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अशेरिगड़ - Asherigad

Printed From: TreKshitiZ
Category: Information Section
Forum Name: Forts of Sahyadri in Hindi
Forum Description: In this section one can find information of forts of Sahyadri in Hindi.
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Printed Date: 22 Nov 2019 at 3:15pm
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Topic: अशेरिगड़ - Asherigad
Posted By: bajpaidivya
Subject: अशेरिगड़ - Asherigad
Date Posted: 14 Aug 2012 at 11:19pm

अशेरिगड़


प्रकार: पहाड़ी किला

पर्वत श्रंखला : पालघर

जिला : थाणे

श्रेणी : कठिन  

पालघर क्षेत्र के चारों ओर बिखरे हुए सभी छोटे किलों में अशेरी को  इसके  विशाल आकार और ऊंचाई के शिखर के कारण  " बड़े भाई " का दर्जा दिया गया है. बड़े ही विशाल क्षेत्र का आवरण होने के कारण यह किला प्रभावशाली तथा मजबूत नजर आता है.

इतिहास 

इतिहास में यह  उल्लेख है कि शिलाहार  राजवंश के वंशज भोजराज ने इस किले का निर्माण करवाया था. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा के यह किला कम से कम ८०० साल पुराना है. पुर्तगालीयों ने किले पर कब्ज़ा करने के बाद  अपने शासन के दौरान इस किले का पुनर्निर्माण करवाया. १७३७ में पेशवाओं ने कोंकण के अपने अभियान के दौरान इस किले को जीता और १८१८ में यह ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया.


दर्शनीय स्थल :

मैदानों में और पथ के अधिकार पर कई बस्तियों के अवशेष देखे जा सकते हैं. यहाँ पर आपको कई जगह नीवं भी नजर आएगी जिनमे नाले कटे हुए  है. ये बरसात के मौसम के दौरान वर्षा का पानी एकत्र करने या अतिप्रवाह का नेतृत्व करने के लिए किये गए हो सकते है. शीर्ष पर गुफा मध्यम आकार की है जिसका मुख बड़े आकर का है. लेकिन यह इस तरह की है कि बाहरी हवा या ठंड अंदर गुफा में प्रवेश नहीं कर सकती. गुफा के पीछे का भाग बहुत ही असमान है. वैसे यहाँ पहरेदारों के आराम करने के लिए दोनों अंदर तथा बहार मंच बनाये गए है. गुफा के प्रवेश द्वार के बाहर दोनों तरफ लगे जास्वंद के पेड़ यह दर्शाते है की अतीत में ग्रामीण लोगो द्वारा यहाँ नियमित रूप से अनुष्ठान किया जाता होगा. गुफा के शीर्ष भाग के बाईं तरफ, चौकोन आकर में पानी की टंकी में बनाई गयी है. इस टंकी में एक आधी दफन तोप भी है. यहाँ और दो आधी बनी टंकिया भी हैं. शीर्ष पठार से, दक्षिण पश्चिम में स्तिथ कोहोज किला भी देखा जा सकता है. दूरबीन की मदद से प्राकृतिक रूप से मानव आकर भी किले पर देखे जा सकते हैं. रास्ते पर आगे जाने पर एक विशाल अवसाद, शिला मुख तथा एक गढ़ देखे जा सकते हैं.

किले तक पहुँचने के तरीके :

किले के ऊपर जाने का केवल एक ही मार्ग उपलब्ध है. यहाँ जाने के लिए आपको  खोडकोना गांव के बस स्टाप पर उतरना पड़ता है. इस गांव तक जाने के लिए पालघर से कासा जाने वाली एस टी बस या इस राजमार्ग पर चलने वाले  निजी वाहनों द्वारा जाया जा सकता है. यह गांव "मस्तान नका" से लगभग १०- ११ किलोमीटर आगे स्थित है. वास्तविक गांव मुख्य सड़क से अंदर कुछ दुरी पर स्थित है. राजमार्ग के बाईं ओर से एक बैलगाड़ी का मार्ग उपलब्ध है. राजमार्ग पर पालघर की ओर अपनी पीठ करके खड़े होने पर आपको दाई दिशा में अदसुल तथा बाईं दिशा में आशेर का विशाल फैलाव नजर आता हैं . बैलगाड़ी से जाने वाला मार्ग एक छोटे पुल के माध्यम से गांव में प्रवेश करता है. यहाँ पर वागदेव का एक छोटासा खूबसूरत मंदिर देखा जा सकता है. गांव में प्रवेश करने पर हमे मिलो फैली फासले आम के बागन और हरियाली में बसे घर दिखा पड़ते है, जिसके कारन  यात्रा की सारी थकान दूर हो जाती हैं . कुए के ठन्डे पाने से अच्छी तरह से अपनी प्यास शांत कर तथा पानी की बोतलें भरकर आप  ग्रामीणों के दिखाए हुए मार्ग पर आगे किले की और प्रस्थान कर सकते है. क्यूंकि यह मार्ग घने जंगलो से गुजरता है यहाँ पर गर्मियों के मौसम में भी गर्मी की तकलीफ महसूस नहीं होती है. मार्ग तक पहुँचाने के लिए लगभग १ से १ १/२ घंटे का वक्त लग सकता है. वैसे तो यह मग पारित करने के लए आसन है परन्तु इस मार्ग पर निरंतर चढ़ाई है. इस पारित को पार करने के बाद थोड़ी उंचाई पर वागदेव का मंदिर स्तिथ है. यहाँ से आप दाई ओर मुड़कर किले की छोटी के लिए प्रस्थान कर सकते है. 

प्रवेश द्वार के आधार तक पहुँचने के लिए हम एक विशाल शिला मुख को पार करते हैं. यहाँ शिला मुख पर आपको श्री गणेश की एक छोटी सी मूर्तिकला नजर आएगी. इस प्रवेश द्वार को विस्फोटकों द्वारा नष्ट कर दिया गया था. यहाँ ऊपर चदते हुए ख्याल रखना चाहिए क्यूंकि यह चढ़ाई काफी वक्र और खड़ी है, जहाँ तक हो सके इस चढ़ाई में किसी विशेषज्ञ से मदद ले. यदि संभव हो तो, अपनी पीठ पर बिना सामान लादे बिना ही चढ़ाई करे. उत्साहजनक परन्तु थका देने वाली यह चढ़ाई करने के बाद, हम शिला मुख के दाहिनी ओर कटी सीढियों तक पहुँच जाते है.. यहाँ पर कुछ  पानी की टंकिया उपलब्ध है परन्तु इसमें मिलने वाला पानी पीने के लिए योग्य नहीं हैं. इन पानी के टंकियों से गुजरते हुए लगभग कंधे लंबाई तक बढ़ी झाड़ियों के माध्यम से निकलते हुए हम किले के मध्य भाग तक पहुँच सकते हैं. बाईं तरफ गुजरने वाली राह के निचे ५ टंकिया है जो चट्टानी जमीन में खुदी हुई हैं. इन टंकियों में से एक टंकी का पानी पीने के योग्य है.५ मिनट आगे चलने के बाद राह दो शाखाओं में बायीं ओर  विभाजित हो जाती है . इस  मार्ग से निचे जाते समय आपको और तीन  पानी की टंकिया नजर आएँगी. इन टंकियों में में पानी बहुत साफ़, मीठा तथा पीने योग्य है. शिला मुख के दाहिने हाथ पर एक गुफा भी मौजूद है.


आवास सुविधा:

लगभग १० से १२ ट्रेकर्स मंदिर तथा उसके बहार बने चबूतरे में रह सकते हैं. हालांकि, खाद्य पदार्थ चूहों से संभल कर रखे.

खाद्य सुविधा:

खाद्य व्यवस्था खुद ट्रेकर्स को ही करनी पड़ती है.

पीने के पानी की सुविधा :

जल यहाँ पर पुरे वर्षभर उपलब्ध रहता है.

किले तक पहुँचने का समय :

किले तक पहुँचाने में लगभग ३ घंटे का समय लग सकता है.

किले पर जाने का उपयुक्त मौसम :

किले पर वर्ष भर में किसी भी मौसम में जाया जा सकता है

टिपण्णी :

यह मुश्किल श्रेणी का किला  है क्योंकि इसकी चढ़ाई का हिस्सा खड़ी चट्टानों के कारन थोड़ा कठिन है और इसीलिए बरसात के दौरान यहाँ चढ़ाई करना खतरनाक हो सकता है. इसीलिए आपको यह सलाह दी जाती है कि केवल अनुभवी ट्रेकर्स की मदद उपलब्ध होने पर ही इस चढ़ाई की कोशिश करे.

 





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